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दुनिया

ओ री दुनिया, ओ री दुनिया…

ऐ ओ री दुनिया….

 

सुरमई आँखों के प्यालों की दुनिया ओ दुनिया,

सुरमई आँखों के प्यालों की दुनिया ओ दुनिया,

सतरंगी रंगों गुलालों की दुनिया ओ दुनिया,

सतरंगी रंगों गुलालों की दुनिया ओ दुनिया,

अलसाई सेजों के फूलों की दुनिया ओ दुनिया रे,

अंगडाई तोडे कबूतर की दुनिया ओ दुनिया रे,

ऐ करवट ले सोयी हकीकत की दुनिया ओ दुनिया,

दीवानी होती तबियत की दुनिया ओ दुनिया,

ख्वाहिश में लिपटी ज़रुरत की दुनिया ओ दुनिया रे,

ऐ इंसान के सपनों की नीयत की दुनिया ओ दुनिया रे,

 

ओ री दुनिया, ओ री दुनिया,

ओ री दुनिया, ओ री दुनिया,

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है, ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है,

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है…

 

ममता की बिखरी कहानी की दुनिया ओ दुनिया,

बहनों की सिसकी जवानी की दुनिया ओ दुनिया,

आदम के हवा से रिश्ते की दुनिया ओ दुनिया रे,

ऐ शायर के फीके लफ्जों की दुनिया ओ दुनिया रे,

 

ओSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSS

 

गा़लिब के मोमिन के ख्वाबों की दुनिया,

मजाज़ों के उन इन्कलाबों की दुनिया,

गा़लिब के मोमिन के ख्वाबों की दुनिया,

मजाज़ों के उन इन्कलाबों की दुनिया,

फैज़े, फिराकों, साहिर व मखदूम,

मीर, किज़ौक, किताबों की दुनिया,

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है, ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है,

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है…

 

पल छिन में बातें चली जाती हैं हैं,

पल छिन में बातें चली जाती हैं हैं,

रह जाता है जो सवेरा वो ढूंढें,

जलते मकान में बसेरा वो ढूंढें,

जैसी बची है वैसी की वैसी बचा लो ये दुनिया,

अपना समझ के अपनों के जैसी उठा लो ये दुनिया,

छिट पुट सी बातों में जलने लगेगी संभालो ये दुनिया,

कट कुट के रातों में पलने लगेगी संभालो ये दुनिया,

ओ री दुनिया, ओ री दुनिया,

 

वो कहें हैं की दुनिया ये इतनी नहीं है,

सितारों से आगे जहां और भी हैं,

ये हम ही नहीं हैं वहाँ और भी हैं,

हमारी हर एक बात होती वहीँ हैं,

हमें ऐतराज़ नहीं हैं कहीं भी,

वो आलिम हैं फ़ाज़िल हैं होंगे सही ही,

मगर फलसफा ये बिगड़ जाता है जो वो कहते हैं,

आलिम ये कहता वहां इश्वर है,

फ़ाज़िल ये कहता वहाँ अल्लाह है,

काबिल यह कहता वहाँ ईसा है,

मंजिल ये कहती तब इंसान से तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया,

ये बुझते हुए चाँद बासी चरागों, तुम्हारे ये काले इरादों की दुनिया,

 

हे ओSSSS री दुनिया, ओSSSS री दुनिया, ओ री दुनियाSSSSSS…

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आरम्भ है प्रचंड…

March 3, 2009 1 comment

आरम्भ है प्रचंड, बोले मस्तकों के झुंड, आज ज़ंग की घडी की तुम गुहार दो,

आन बान शान, या की जान का हो दान, आज एक धनुष के बाण पे उतार दो!

आरम्भ है प्रचंड…

मन करे सो प्राण दे, जो मन करे सो प्राण ले, वही तो एक सर्वशक्तिमान है,

कृष्ण की पुकार है, यह भागवत का सार है कि युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है,

कौरवों की भीड़ हो या पांडवों का नीड़ हो जो लड़ सका है वो ही तो महान है!

जीत कि हवस नहीं, किसी पे कोई वश नहीं, क्या ज़िन्दगी है ठोकरों पे वार दो,

मौत अंत है नहीं, तो मौत से भी क्यों डरें, यह जा के आसमान में दहाड़ दो!

आरम्भ है प्रचंड…

वो दया का भाव, या कि शौर्य का चुनाव, या कि हार का वो घाव तुम यह सोच लो,

या कि पूरे भाल पे जला रहे विजय का लाल, लाल यह गुलाल तुम यह सोच लो,

रंग केसरी हो या, मृदंग केसरी हो या कि केसरी हो ताल तुम यह सोच लो!

जिस कवि कि कल्पना में ज़िन्दगी हो प्रेम गीत, उस कवि को आज तुम नकार दो,

भीगती मसों में आज, फूलती रगों में आज, आग कि लपट का तुम बघार दो!

आरम्भ है प्रचंड…

आरम्भ है प्रचंड…

आरम्भ है प्रचंड…

-पियूष मिश्रा

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